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बाघों की गणना

Tue 30 Jul, 2019

29 जुलाई को अंतर्राष्‍ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा संकलित बाघों के अखिल भारतीय अनुमान-2018 के चौथे चक्र के परिणाम को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने जारी किया। सर्वेक्षण के अनुसार 2018 में भारत में बाघों की संख्‍या बढ़कर 2,967 हो गई है।इसके मुताबिक 2014 के मुकाबले बाघों की संख्या में 741 बढ़ोत्तरी हुई है।

पृष्ठभूमि  

  • बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है और इसका वैज्ञानिक नाम पैन्थरा टिगरिस (Panthera Tigris) है।
  • अवैध शिकार के कारण वर्ष 1970 में बाघों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा था।
  • वर्ष 1972 में वन्य जीव संरक्षण कानून लागू हुआ, तो बाघों को खतरे में पड़ी प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क सहित नौ रिजर्व में वर्ष  1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई।
  • सरकार ने बाघों की गणना के लिए वार्षिक सर्वे की व्यवस्था की जिसके परिणामस्वरूप 1990 के बाद इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
  • इस संरक्षण अभियान को 2006 में तब बल मिला, जब सरकार ने वन्य जीव संरक्षण कानून में संशोधन किया। इसके साथ ही वन्य जीव अपराध नियंत्रण बोर्ड का किया गया, जिससे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण सशक्त हुआ।
  • 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में 13 देशों ने हिस्सा लिया था। इनमें भारत समेत बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, वियतनाम, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया, चीन, रूस, थाईलैंड, लाओस शामिल थे। इन देशों ने 2022 तक बाघों की संख्या दोगुना करने का लक्ष्य तय किया था।

बाघों के अखिल भारतीय अनुमान-2018 के मुख्य निष्कर्ष

  • बाघों की संख्‍या दोगुनी करने की सेंट पीटर्सबर्ग घोषणापत्र की प्रतिबद्धता को 2022 की समय सीमा से पहले ही हासिल कर लिया है।
  • वर्ष 2014 में संरक्षित क्षेत्र 692 (Protected Area) संरक्षित क्षेत्र थे जिनकी संख्‍या 2019 में बढ़कर 860 से अधिक हो गई है।
  • 2014 में सामुदायिक शरणस्‍थलों (Community Reserve) की संख्‍या 43 से बढ़कर 100 हो गई है।
  • मध्‍य प्रदेश में बाघों की संख्‍या सर्वाधिक (526) इसके बाद कर्नाटक (524) एवं उत्‍तराखंड (442) में है।
  • पेंच बाघ अभयारण्‍य, मध्‍य प्रदेश में सर्वाधिक बाघ हैं, जबकि तमिलनाडु स्थित सत्‍यमंगलम बाघ अभयारण्‍य में सबसे अच्‍छा प्रबंधन है।  
  • छत्‍तीसगढ़ और मिजोरम में बाघों की संख्‍या में गिरावट देखने को मिली, जबकि ओडिशा में इनकी संख्‍या अपरिवर्तनशील रही।
  • भारत बाघों की संख्‍या का आकलन करने के लिए मार्क-रीकैप्‍चर फ्रेमवर्क(Mark-recapture Framework) को शामिल कर दोहरे प्रतिचयन दृष्टिकोण का इस्‍तेमाल करता है।    
  • एन्‍ड्रॉयड आधारित एप्‍लीकेशन M-STRIPS (मॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स) का इस्‍तेमाल करते हुए आंकड़े एकत्र किए गए और एप्‍लीकेशन के डेस्‍कटॉप मॉडयूल पर इनका विश्‍लेषण किया गया।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority)

  • वर्ष 2006 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों में संशोधन कर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना की गई।
  • यह वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।