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टिड्डियों की समस्या

Thu 28 May, 2020

हाल ही में फसलों को बुरी तरह प्रभावित करने वाली टिड्डियों का पिछले कुछ दिनों से राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र (विदर्भ क्षेत्र) के शहरी क्षेत्रों में देखा जाना चिंता का विषय है। मानसून से पहले आगमन होने की वज़ह से इनके मार्गों में सूखाग्रस्त क्षेत्र जहाँ भोजन व आश्रय न मिलने के कारण ये टिड्डियाँ हरी वनस्पति की तलाश में राजस्थान की तरफ बढ़ती गई है। 

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation-FAO) के अनुसार, टिड्डियाँ भोजन की तलाश हेतु शहरी क्षेत्रों में प्रवेश कर रहीं हैं।

मुख्य बिंदु

  • टिड्डी एक प्रकार के उष्णकटिबंधीय कीड़े होते हैं जिनके पास उड़ने की अतुलनीय क्षमता होती है जो विभिन्न प्रकार की फसलों को नुकसान पहुँचाती हैं। टिड्डियों की प्रजाति में रेगिस्तानी टिड्डियाँ सबसे खतरनाक और विनाशकारी मानी जाती हैं।
  • टिड्डियों के पूर्वागमन का प्रमुख कारण मई और अक्तूबर 2018 में आए मेकुनु और लुबान नामक चक्रवाती तूफान हैं, जिनके कारण दक्षिणी अरब प्रायद्वीप के बड़े रेगिस्तानी इलाके झीलों में तब्दील हो गए थे। अतः इस घटना के कारण भारी मात्रा में टिड्डियों का प्रजनन हुआ था।
  • भारत में टिड्डियों की निम्निखित चार प्रजातियाँ पाई जाती हैं:- रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, बॉम्बे टिड्डी, ट्री टिड्डी। वर्तमान में फसल के नुकसान होने की संभावना कम है क्योंकि किसानों ने अपनी रबी की फसल की कटाई पहले ही कर ली है। लेकिन महाराष्ट्र में टिड्डियों की बढ़ती जनसंख्या को लेकर नारंगी उत्पादक काफी चिंतित हैं।

टिड्डी चेतावनी संगठन (Locust Warning Organization-LWO)

  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage) के अधीन आने वाला टिड्डी चेतावनी संगठन मुख्य रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में टिड्डियों की निगरानी, ​​सर्वेक्षण और नियंत्रणकर्ता  है।
  • इसका मुख्यालय फरीदाबाद में स्थित है।